आर्थिक तौर पर दुनिया के सबसे संपन्न देशों के समूह जी -7 के नेताओं ने रूस के आक्रमण के विरुद्ध यूक्रेन के समर्थन और मदद का वादा किया है। साथ ही यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने पर भी एकमत हुए हैं। इन नेताओं ने कहा कि यूक्रेन का समर्थन करने के लिए एकजुट रुख अपनाया गया है। वे युद्ध को वित्त पोषित करने वाले तेल की बिक्री से रूस की आय को सीमित करने के लिए दूरगामी कदमों की तलाश करेंगे। जर्मनी में जी-7
देशों के शिखर सम्मेलन के बाद मंगलवार को बयान जारी किया गया। इसमें रूस को गंभीर और तत्काल आर्थिक चोट पहुंचाने की बात कही गई है। इसमें यूक्रेन पर हमले के लिए जिम्मेदार रूस को गंभीर और इकोनॉमिक सैंक्शन को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। नेताओं ने रूसी हमलों, ग्लोबल इकोनॉमिक क्राइसिस, वैक्सीन, महंगाई से लेकर जलवायु संकट पर चर्चा की।
रूसी सोने के आयात पर प्रतिबंध
समूह के सदस्य देश रूसी तेल के आयात को रोकने के उपायों की तलाश करने के लिए आने वाले हफ्तों में और अधिक चर्चा करेंगे। इससे रूसी आय का एक प्रमुख स्रोत प्रभावित होगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही ऊर्जा की कीमतों से राहत मिलेगी। नेताओं ने रूसी सोने के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उन देशों को मदद देने पर सहमति जताई, जो काला सागर के रास्ते यूक्रेनी अनाज का परिवहन रुकने से प्रभावित हैं। अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, इटली, ब्रिटेन, कनाडा और जापान के नेताओं ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बातचीत के बाद समर्थन का वादा किया।